
जमशेदपुर, 06 जनवरी 2026:
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सशक्त पहल करते हुए ‘बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान’ के अंतर्गत बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा, जमशेदपुर में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाकर बाल विवाह को जड़ से समाप्त करना और सुरक्षित व सशक्त महिला–सशक्त झारखंड के लक्ष्य को साकार करना रहा।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान, जिला परिषद उपाध्यक्ष श्री पंकज सिन्हा, अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम श्री अर्नव मिश्रा, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती संध्या रानी सहित बीडीओ, सीओ, मुखिया, ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, एएनएम, पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं विभिन्न प्रखंडों-अंचलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान ने कहा कि परंपराएं तभी तक सम्मान योग्य हैं, जब तक वे मानव गरिमा और अधिकारों की रक्षा करें। बाल विवाह न केवल एक सामाजिक कुरीति है, बल्कि एक गंभीर अपराध भी है। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। इसे रोकने के लिए प्रशासन के साथ-साथ समाज की सामूहिक सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखते हुए प्रशासन तत्काल कार्रवाई करेगा।
अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम श्री अर्नव मिश्रा ने कहा कि अब समय आ गया है कि बाल विवाह के विरुद्ध होने वाली चर्चाओं को व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि समाज में हो रहे बाल विवाह के खिलाफ कितने लोग वास्तव में आवाज उठाते हैं। जिस दिन समाज स्वयं आगे आकर इस कुप्रथा का विरोध करेगा, उसी दिन बाल विवाह में स्वतः कमी आएगी।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती संध्या रानी ने जानकारी दी कि राज्य में बाल विवाह की दर 32.2 प्रतिशत है, जो अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है और इसके प्रभावी उन्मूलन के लिए कानून की जानकारी तथा उसका सख्ती से क्रियान्वयन आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पूर्वी सिंहभूम को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
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आनंद किशोर
ब्यूरो चीफ, अखंड भारत न्यूज़
ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन

